इंद्रध्वज महामंडल विधान में समर्पित किए 390 अघ्र्य

चातुर्मास : 28 तक चल रहा धार्मिक अनुष्ठान, 51 पूजा से हो रही 458 अकृत्रिम जिनालयों की वंदना
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर फ्रीगंज में 21 से 28 जुलाई तक चल रहे आयोजन में शनिवार को पांचवे दिन इंद्रध्वज महामंडल विधान हुआ। विधानाचार्य पं. श्रेयस जैन पिण्डरई के सान्निध्य में प्रतिदिन अनुष्ठान व पूजन-अर्चना
हो रही है।
अध्यक्ष धर्मेन्द्र सेठी, सचिव राहुल जैन ने बताया कि जैन शास्त्रों में इन्द्रध्वज महामंडल विधान को सर्वश्रेष्ठ मंडल विधानों में स्थान प्राप्त है। आर्यिका पूर्णमती माताजी द्वारा रचित इस विधान में 51 पूजाओं के माध्यम से मध्यलोक स्थित 458 अकृत्रिम जिनालयों की वंदना की जाती है। शनिवार को पांचवें दिन तक पंचमेरु से संबंधित 390 अघ्र्य मंडल जी पर समर्पित किए जा चुके हैं। आगामी दिनों में नंदीश्वर द्वीप स्थित 52 जिनालयों तथा मनुषोत्तर पर्वत स्थित जिनालयों पर ध्वजाएं समर्पित की जाएंगी।
आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी मुनिराज, आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी मुनिराज तथा मुनि श्री प्रणीतसागर जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त है। विधान में ध्वजारोहणकर्ता राजेन्द्र राजश्री, द्रव्य प्रदाता श्रीमती सारिका, रूबी एवं लविश जैन परिवार, मुख्य कलश के पुण्यार्जक कैलाश दादा, संजय एवं सारिका जैन तथा यज्ञ नायक रुपेन्द्र-सुलोचना एवं श्रीमती सरोज सेठी हैं। आयोजन का संचालन पंचायती मंदिर ट्रस्ट, दिगंबर जैन समाज एवं नारी चेतना मंडल, उज्जैन द्वारा किया जा
रहा है।
ऋषभदेव केशरियानाथ पेढ़ी में साध्वीवर्या का मंगल प्रवेश, शोभायात्रा निकली
उज्जैन। ऋषभदेव केशरियानाथ पेढ़ी खाराकुआ पर चातुर्मास के लिए पधारीं साध्वीवर्या दिव्ययशाश्री, दिव्यदर्शाश्री और दिव्यनेहाश्री का चातुर्मास प्रवेश हुआ। सामैया प्रवेश दौलतगंज स्थित कांच मंदिर से शुरू होकर खाराकुआ मंदिर पहुंचा। इसमें नगर में विराजित साध्वी उपेन्द्र यशाश्री और तारक रत्नाश्री भी शामिल हुईं। शोभायात्रा में विभिन्न समाजजनों के साथ ही बाहर से आए श्रावक-श्राविकाएं और महिला मंडल भी शामिल हुआ। खाराकुआ मंदिर पहुंचने के बाद धर्मसभा हुई। महिला मंडलों और तरवेचा बंधुओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किए। विधायक अनिल कालूहेड़ा ने स्वागत उद्बोधन दिया। राजमल मोहनलाल परिवार ने साध्वी को कांबली ओढ़ाने का लाभ लिया। इंदौर के अभय वागरेचा परिवार ने गुरु पूजा का लाभ लिया। संचालन प्रमोद जैन ने किया।
श्रद्धावान् लभते फलम् : श्रद्धा के लिए पूर्ण समर्पण जरूरी- ऋषभरत्नविजयजी महाराज
उज्जैन। वास्तविक श्रद्धा का अर्थ पूर्ण समर्पण है। जब व्यक्ति अपने अहंकार, संदेह और तर्क को त्यागकर गुरु तथा परमात्मा के प्रति अटूट विश्वास रखता है, तभी उसके जीवन में धर्म का वास्तविक अनुभव प्रारंभ होता है और यह उसके आत्मकल्याण का मूल आधार बनता है।
आचार्यदेव श्रीमद् विजय वीररत्नसूरीश्वरजी महाराजा की कृपा एवं आचार्यदेव श्रीमद् विजय पद्मभूषणरत्नसूरीश्वरजी महाराजा के सान्निध्य में रविवार को अरविंद नगर में हुई धर्मसभा में पंन्यास प्रवर श्री ऋषभरत्नविजयजी ने श्रद्धावान् लभते फलम् विषय पर प्रवचन दिए। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि बुद्धि और तर्क की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन जब इनकी सीमा समाप्त होती है, वहीं से श्रद्धा का आरंभ होता है। उन्होंने श्रद्धा की सरल व्याख्या करते हुए कहा कि एक नास्तिक को मंदिर में केवल पत्थर दिखाई देता है, आस्तिक को मूर्ति दिखाई देती है, जबकि श्रद्धालु उसी मूर्ति में साक्षात भगवान के दर्शन करता है। श्रद्धा के साथ किया गया धर्मकार्य, आराधना, गुरु भक्ति और साधना कई गुना अधिक फलदायी बन जाती है।









