अब मेड-इन-इंडिया ही नहीं, मेड-बाय-इंडिया फोन पर जोर

बिक्री का न्यूनतम स्तर हासिल करना होगा: मंत्री अश्विनी वैष्णव
नईदिल्ली, एजेंसी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकार वाले और देश में डिजाइन किए गए मोबाइल फोन अगले 10-14 महीने के भीतर बाजार में आने की उम्मीद है। ये फोन 62,500 करोड़ रुपये की ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (एमपीएमएस) के तहत पेश किए जाएंगे।
वैष्णव ने एमपीएमएस की अधिसूचना जारी किए जाने के मौके पर कहा कि इस योजना के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों को यह साबित करना होगा कि मोबाइल फोन के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले डिजाइन के बौद्धिक संपदा अधिकार उनके पास हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें तीन ऐसी कंपनियां दिख रही हैं, जिनमें अब से करीब 10-14 महीने में इस क्षेत्र में आने की क्षमता है। फिलहाल कोई भी मोबाइल फोन पूरी तरह भारत में डिजाइन नहीं किया जाता है। घरेलू ब्रांड लावा इंटरनेशनल और एआई प्लस का दावा है कि वे अपने स्मार्टफोन को स्थानीय स्तर पर ही डिजाइन करते हैं।
एमपीएमएस को दो हिस्सों में बांटा गया है। एस1 के तहत अनुबंध पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियों समेत पिछले वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली मोबाइल फोन कंपनियां योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होंगी। टीएस2 के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों में 51 प्रतिशत भारतीय स्वामित्व और वित्त वर्ष 2025-26 में कम-से-कम 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार होना जरूरी है।
भारतीय ब्रांड विकसित करने पर ध्यान देने का समय – वैष्णव ने कहा कि भारत में पहले मोबाइल फोन विनिर्माण का परिवेश था, लेकिन कर-संबंधी मुद्दों और चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में टिक पाना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि अब विनिर्माण का परिवेश फिर से स्थापित हो गया है और भारतीय ब्रांड विकसित करने पर ध्यान देने का समय है।









