मित्रविंदाधाम : कान्हा की ससुराल में फलाहारी भंडारा, मोतियों की माला से सजा मंदिर

रात 12 बजे होगी प्राकट्य आरती, उससे पहले गूंजेंगे मनमोहन के भजन
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जन्माष्टमी पर आप कुछ अनूठा देखना-सुनना चाहते हैं तो इस बार भैरवगढ़ मार्ग स्थित मित्रविंदा धाम हो आइए। वीर सावरकर चौराहे से करीब 300 मीटर दूर राइट साइड पर टेकरी पर यह धाम बसा है। इस की खासियत यह है कि यहां कान्हा की ससुराल है।
ऐसे में कान्हा का जन्मदिन ससुराल में मनाने की जोरदार तैयारी की जा रही है। धाम को मालाओं से सजाया गया है। दरअसल, मित्रविंदा उज्जैन के राजा जयसेन की पुत्री थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे शादी की थी। वे उनकी पांचवीं पटरानी थीं। पुजारी गिरीश गुरु बताते हैं कि संत शंकर गुरु बालक ने मित्रविंदा धाम की स्थापना की थी। यहां कान्हा और मित्रविंदा की प्रतिमा जोड़े से हैं। चूंकि दोनों गहरे प्रेेम के प्रतीक है, ऐसे में धाम की ख्याति भी खूब है। गुरु कहते हैं कि यहां दर्शन करने से परिवार में प्रेम बना रहता है। शादी-ब्याह में अड़चन नहीं आती। चूंकि कान्हा उज्जैन के जमाई (दामाद)हैं तो उनका जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनेगा।
शुरुआत दोपहर अभिषेक से, समापन प्राकट्य आरती से
जन्माष्टमी समारोह का आगाज शुक्रवार दोपहर विशेषअभिषेक से होगा। शाम 6 बजे से मंदिर में दर्शन शुरू होंगे और यह सिलसिला देर रात तक चलेगा। इस बीच दिल्ली के गायक रितिक गुप्ता श्रीकृष्ण भजनों की प्रस्तुति देंगे। इस मौके पर फलाहारी भंडारा भी होगा।
अभिमंत्रित 5 हजार मोरपंखों का वितरण
समारोह की सबसे खास बात मोरपंख रहेंगे। गिरीश गुरु एवं भविष्य गुरु ने बताया कि अभिमंत्रित 5 हजार मोरपंखों का वितरण किया जाएगा। यह भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा पवित्र प्रतीक है। इसे घर में रखने से शांति एवं प्रेम का वास होता है। रात 12 बजे प्राकट्य महाआरती होगी। इसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। गिरीश गुरु ने कार्यक्रम में शामिल होने का अनुरोध धर्मप्रेमी जनता से किया है।









