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अमेरिका ने भारत के सोलर सेल-पैनलों पर भारी शुल्क लगाया

123.04 प्रतिशत तक डंपिंAग-रोधी शुल्क

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वॉशिंगटन। अमेरिका ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात होने वाले सौर सेल और सोलर पैनलों पर भारी शुल्क लगाने का फैसला किया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग का आरोप है कि इन देशों के उत्पादकों और निर्यातकों को अनुचित सब्सिडी मिली, जिससे अमेरिकी सौर उद्योग को नुकसान पहुंचा।

वाणिज्य विभाग ने जांच पूरी करने के बाद इन देशों से आयात होने वाले क्रिस्टलीय सिलिकॉन सोलर सेल पर डंपिंग-रोधी और प्रतिपूर्ति शुल्क निर्धारित किए हैं।

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भारतीय उत्पादकों पर 123.04 प्रतिशत डंपिंग-रोधी शुल्क

अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, भारतीय उत्पादकों के लिए 123.04 प्रतिशत, इंडोनेशियाई उत्पादकों के लिए 94.36 प्रतिशत और लाओस के उत्पादकों के लिए 65.43 प्रतिशत डंपिंग-रोधी शुल्क तय किया गया है।

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इसके अलावा भारतीय उत्पादकों पर 126.09 प्रतिशत, इंडोनेशियाई उत्पादकों पर 173.7 प्रतिशत और लाओस के उत्पादकों पर करीब 153.67 प्रतिशत प्रतिपूर्ति शुल्क निर्धारित किया गया है।

अमेरिकी उद्योग को नुकसान का दावा

अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन देशों से आने वाले सौर उत्पादों को कथित तौर पर अनुचित सरकारी सहायता मिली। इसके कारण अमेरिकी कंपनियों को कीमतों और प्रतिस्पर्धा के स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा।

वाणिज्य विभाग ने कहा कि शुल्क लगाने का फैसला जांच के दौरान सामने आए आंकड़ों और निष्कर्षों के आधार पर लिया गया है। इन शुल्कों का असर भारत सहित संबंधित देशों से अमेरिका को होने वाले सोलर सेल और पैनल निर्यात पर पड़ सकता है।

सौर उद्योग पर पड़ सकता है असर

अमेरिका के इस फैसले से वैश्विक सौर आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने की संभावना है। भारत के सौर उत्पाद निर्माताओं और निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है। वहीं, शुल्क बढ़ने से अमेरिकी बाजार में सोलर सेल और पैनलों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

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