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फ्रीगंज ओवरब्रिज के समानांतर नए आरओबी का टेंडर ही नहीं हो सका जारी

आचार संहिता ने रोकी सिक्स लेन की रफ्तार, मंत्री की आपत्ति से अटका ब्रिज

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:उज्जैन से इंदौर के सफर को तेज रफ्तार देने के लिए प्रस्तावित सिक्स लेन प्रोजेक्ट का काम लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण थम गया है। आचार संहिता का ब्रेक हटने के बाद यह शुरू हो सकेगा। फ्रीगंज ओवरब्रिज के समानांतर नए आरओबी का काम भी अधर में पड़ गया है। इसका टेंडर जारी कर भूमिपूजन करने का पर्याप्त समय था, लेकिन राज्य सरकार के एक मंत्री की आपत्ति ने इसका काम रोक दिया है। इसका निराकरण भी अब चुनाव बाद ही हो सकेगा।

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावशील होने से वे सारे काम रुक गए हैं, जिनके टेंडर नहीं लगाए जा सके और भूमिपूजन नहीं किया जा सका। इनमें सबसे प्रमुख इंदौर, उज्जैन फोरलेन को सिक्स लेन करने का प्रोजेक्ट है। प्रदेश की मोहन यादव सरकार कैबिनेट में इसे हरी झंडी दे चुकी है, लेकिन अभी इसका टेंडर जारी नहीं हो सका है। 45.475 किमी लंबे फोरलेन को सिक्स लेन करने पर 1692 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।

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टेंडर जारी होने के बाद खर्च की स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी। टेंडर की प्रोसेस शुरू हो चुकी है और चुनाव बाद यह पूरी हो सकेगी। एमपीआरडीसी के अधिकारियों के अनुसार एजेंसी तय होने और वर्कऑर्डर जारी होने में तीन माह का समय लग सकता है। सिक्स लेन में एक त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर को जोडऩे वाली सड़क को भी चौड़ा किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर यह प्रावधान विशेष रूप से किया गया है। इससे शनि मंदिर आने वाले दर्शनार्थियों को आवागमन में सुविधा होगी। इसे करीब 50 फीट चौड़ा किया जाएगा।

पीएस ने देखी लोकेशन, जल्द होगा निर्णय

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शहर में हुई इन्वेस्टर समिट के दौरान लोक निर्माण विभाग सेतु प्रमुख सचिव भी आए थे। उन्होंने भी ब्रिज की योजना देखी और चामुंडा माता मंदिर की ओर बनने वाले एप्रोच रोड की लोकेशन देखी है। हालांकि यह स्कूल की सीमा से दूर है। इस कारण विभाग और सरकार इस पर जल्द ही कोई फैसला लेने की तैयारी में हैं ताकि काम आगे बढ़ सके।

प्राइवेट स्कूल के चक्कर में मंत्री का विरोध

सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए फ्रीगंज ओवरब्रिज के समानांतर नया ब्रिज बनाने की प्रशासकीय स्वीकृति विधानसभा चुनाव से पहले दी जा चुकी है, लेकिन टेंडर जारी होने के बाद भी विभाग से मंजूर नहीं हो सका है। सूत्रों के अनुसार ब्रिज की राह में एक निजी स्कूल भी आ रहा है। इस स्कूल की जमीन को बचाने के लिए प्रदेश सरकार के एक मंत्री मैदान में आ गए हैं।

वे चाहते हैं कि इस स्कूल की जमीन से होकर एप्रोच रोड न बनाई जाए, लेकिन तत्कालीन शिवराज सरकार ने जो प्रशासकीय स्वीकृति दी थी उसके अनुसार ब्रिज की स्वीकृत डिजाइन में बदलाव नहीं किया जा सकता। इस कारण प्रोजेक्ट अधर में पड़ा हुआ है। इन मंत्री के खास मोदी सरकार में मंत्री हैं। इस कारण विभाग भी कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है। लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग के अधिकारी भी अभी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि विभाग ने स्थानीय स्तर पर टेंडर लगा दिया था, लेकिन टेंडर खुलने से पहले मंत्री की आपत्ति से अधिकारी पसोपेश मेें हैं।

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