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पाइप लाइन से नर्मदा का पानी शिप्रा में मिलना शुरू

अफसर बोले… डेड स्टोरेज से भी कान्ह का दूषित पानी बहा रहे

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन त्रिवेणी से लेकर रामघाट तक शिप्रा नदी को खाली करने का काम पीएचई द्वारा स्टॉपउेम के गेट खोलकर शुरू किया गया था। अफसरों के मुताबिक नदी से कान्ह का दूषित पानी बहा दिया गया है। अब डेड स्टोरेज के पानी को भी बहा रहे हैं जिसके बाद 3 दिन में गऊघाट पाले पर नर्मदा का साफ पानी स्टोर कर लिया जाएगा।

पाइप लाइन से नर्मदा का पानी शिप्रा नदी में छोडऩा शुरू कर दिया गया है। त्रिवेणी से लेकर गऊघाट के बीच स्थित डेड स्टोरेज में कान्ह का दूषित पानी रह गया था उसे भी नर्मदा के पानी से आगे बहाया जा रहा है। फिलहाल गऊघाट स्टॉपडेम का एक गेट खुला है। त्रिवेणी डाऊनस्ट्रीम से बहकर आने वाले नर्मदा के पानी को गऊघाट पर स्टोर करने की योजना है। पीएचई से मिली जानकारी के अनुसार अगले 2-3 दिनों में नर्मदा का पानी गऊघाट पर स्टोर कर लिया जायेगा और इसी पानी को आगे भूखी माता, नृसिंहघाट, रामघाट, सुनहरी घाट तक बहाकर स्टोर किया जायेगा।

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फिर बन रहा कच्चा पाला

त्रिवेणी पर कान्ह के दूषित पानी को रोकने के लिये जल संसाधन विभाग द्वारा मिट्टी का कच्चा पाला बनाया जाता रहा है जो बार-बार पानी का दबाव बढऩे के बाद टूट जाता है। इस बार फिर विभाग द्वारा कान्ह के दूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिये कच्चा पाला बनाने का काम शुरू किया गया है। पीएचई अफसरों का कहना है कि राघोपिपल्या स्टॉपडेम से कान्ह के पानी को रोकने की कोशिशें जारी हैं। वहीं दूसरी ओर कान्ह डायवर्शन से भी कान्ह का दूषित पानी बहाया जा रहा है। इसके बाद भी पानी आता है तो उसे त्रिवेणी स्टॉपडेम पर रोका जायेगा ताकि गऊघाट पर स्टोर नर्मदा का साफ पानी दूषित न हो।

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नर्मदा का पानी पाइप लाइन के माध्यम से आना शुरू हो चुका है। फिलहाल 1.75 क्यूबिक लीटर प्रति सेकंड के मान से नर्मदा का पानी शिप्रा नदी में मिल रहा है। इस पानी को गऊघाट स्टॉपडेम पर स्टोर किया जाना है। गऊघाट के बाद इसी साफ पानी को रामघाट तक स्टोर करेंगे। एन.के. भास्कर, कार्यपालन यंत्री पीएचई

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