ग्रीनफील्ड रिफाइनरी के उद्घाटन कर बोले पीएम मोदी, संकट में लिए सही फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में देश के पहले ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का भव्य उद्घाटन किया। इस परियोजना की शुरुआत को देश के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में एक बहुत ही ऐतिहासिक और बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इस खास और बेहद महत्वपूर्ण उद्घाटन समारोह के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर चल रहे विभिन्न हालातों और देश की मजबूत होती स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज राजस्थान की इस पावन धरती से वह देश के एक और बड़े सामर्थ्य और इच्छाशक्ति की खुलकर चर्चा करना चाहेंगे। उन्होंने जनता को याद दिलाते हुए कहा कि आप सभी भी अपनी आंखों से देख रहे हैं कि पश्चिमी एशिया में जारी भीषण युद्ध की वजह से आज पूरी की पूरी दुनिया में एक तरह से हाहाकार मचा हुआ है और दुनिया का लगभग हर एक छोटा-बड़ा देश इस संकट से बुरी तरह त्रस्त नजर आ रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि पश्चिमी एशिया के इस विनाशकारी युद्ध ने पूरी दुनिया के सामने 21वीं सदी के सबसे बड़े और गहरे ऊर्जा संकट को जन्म दे दिया है। दुनिया के कई बड़े-बड़े और विकसित देश आज अपने यहाँ ईंधन की भारी किल्लत और लगातार बढ़ती कमी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। लेकिन इन विपरीत अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भी 21वीं सदी के इस सबसे बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की अटूट इच्छाशक्ति और निरंतर किए गए प्रयास पूरी तरह भारी पड़े हैं।
वैश्विक संकट के इस अत्यंत कठिन समय में भारत सरकार ने सही नीति और कूटनीति के तहत लिए सटीक फैसले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की रणनीतिक सफलता का उल्लेख करते हुए गर्व से कहा कि भारत ने इस संकट काल में हर स्तर पर बिल्कुल सही और समय अनुकूल फैसले लिए हैं। सरकार ने इस बड़े वैश्विक संकट का समय रहते बेहद सटीक आकलन किया और देश को सुरक्षित रखने के लिए समय पर एक अत्यंत प्रभावी रणनीति का निर्माण किया। इस पूरी अवधि में भारत के पास मौजूद आंतरिक संसाधनों का बहुत ही संतुलित तरीके से प्रयोग किया गया, जिसने हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान की।
इसके साथ ही भारत सरकार ने अपनी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक शक्ति यानी डिप्लोमेटिक पावर का बहुत ही सकारात्मक और बेहतरीन इस्तेमाल किया। इसी चौतरफा सटीक रणनीति का परिणाम है कि आज भारत इतने बड़े वैश्विक संकट से पूरी तरह सुरक्षित होकर उबर पाने में पूरी तरह सफल रहा है। पीएम ने कहा कि हमारी यह नीति दुनिया भर के रणनीतिकारों के लिए एक मिसाल है कि कैसे संकट के समय में भी देश की विकास दर और आम जनता की बुनियादी जरूरतों को बिना प्रभावित किए संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
विपक्षी ताकतों द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों और आशंकाओं के बीच दिन-रात काम करती रही सरकार
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें देश के भीतर तरह-तरह की अफवाहें और विभिन्न आशंकाएं फैलाने में पूरी तरह व्यस्त थीं, ठीक उसी समय सरकार द्वारा किस बड़े स्केल पर दिन-रात लगातार काम किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि उस दौरान सरकार की विभिन्न टीमें पर्दे के पीछे किस तरह देश की नाजुक स्थिति को बहुत ही समझदारी के साथ संभाल रही थीं, यह बात जनता अच्छी तरह जानती है।
उन्होंने देश की कार्यप्रणाली को रेखांकित करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में किया गया वह कठिन परिश्रम, वह निरंतर प्रयास, वह असीम धैर्य और नीतिगत तथा कूटनीतिक स्तर पर उठाया गया एक-एक बेहद संवेदनशील कदम देश के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा संकट को टालने के लिए उठाए गए ये सभी कदम वास्तव में अभूतपूर्व हैं और इन्होंने देश की आत्मनिर्भरता को पूरी दुनिया के सामने एक नई पहचान दी है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने जनसभा में कड़े शब्दों में कहा कि इस ऊर्जा संकट के दौरान देश में बहुत सी अफवाहें फैलाई गईं, आम लोगों को डराने का प्रयास किया गया और उन्हें ईंधन की कमी का डर दिखाकर भड़काया भी गया। संकट के इस समय में भी कुछ लोगों द्वारा राजनीति के गंदे खेल खेले गए, लेकिन जिनके इरादे गलत थे और जो देश में अराजकता देखना चाहते थे, वे अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं हो पाए। देश के दूर-सुदूर और ग्रामीण इलाकों में भी छोटी-मोटी अड़चनों के अलावा ईंधन की सप्लाई में कोई बड़ी चुनौती नहीं आने दी गई।
कंपनियों के घाटे को सरकारी खजाने से पूरा कर आम जनता के सिर पर नहीं पड़ने दिया महंगाई का बोझ
प्रधानमंत्री ने सरकार द्वारा आम जनता को दी गई बड़ी आर्थिक राहत का ब्योरा देते हुए बताया कि केवल अप्रैल से लेकर जून के महीने के बीच ही अकेले डीजल और पेट्रोल की कीमतों को स्थिर रखने के कारण तेल कंपनियों को 75 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का भारी घाटा सहना पड़ा था। सरकार ने तेल कंपनियों के इस भारी-भरकम घाटे को पूरा करने की पूरी वित्तीय जिम्मेदारी सीधे तौर पर अपने सरकारी खजाने के ऊपर उठा ली, ताकि इसका असर आम लोगों की जेब पर न पड़े।
उन्होंने अंत में सरकार के एक और बड़े कल्याणकारी कदम की जानकारी देते हुए कहा कि आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए हमने प्रति लीटर ईंधन पर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी को भी कम करने का बड़ा फैसला लिया। सरकार के इन तमाम वित्तीय प्रयासों और कड़े नीतिगत निर्णयों के कारण ही वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें आसमान छूने के बावजूद भारतीय जनता पर महंगाई का बहुत ज्यादा सीधा बोझ नहीं पड़ने दिया गया और देश में ईंधन की कीमतें स्थिर और नियंत्रण में बनी रहीं।









