पासपोर्ट पर नया विवाद: शशि थरूर बोले- सरकार का फैसला बेतुका

पासपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार के हालिया स्पष्टीकरण के बाद देश में नई बहस छिड़ गई है। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं, बल्कि केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। इस बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार को घेरते हुए इसे “बेतुका कानूनी विरोधाभास” बताया।

थरूर ने सरकार से क्या सवाल पूछे?
शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर पासपोर्ट भी नागरिकता साबित नहीं करता, तो फिर आम भारतीय अपनी नागरिकता किस दस्तावेज से साबित करेगा?
उन्होंने कहा कि वर्षों से पासपोर्ट को सबसे विश्वसनीय सरकारी दस्तावेज माना जाता रहा है। ऐसे में सरकार का यह बयान लोगों के बीच भ्रम पैदा करेगा और नागरिकता से जुड़े मामलों में अनावश्यक विवाद बढ़ाएगा।
थरूर ने क्या सुझाव दिया?
थरूर ने सरकार को नागरिकता संबंधी नियमों में स्पष्टता लाने के लिए कई सुझाव दिए।
- पासपोर्ट और सामान्य आधार कार्ड को भारतीय नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण माना जाए।
- UIDAI विदेशी नागरिकों और भारत में रहने वाले गैर-भारतीय निवासियों के लिए अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी करे।
- इससे नागरिकता सत्यापन, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होने वाले विवाद कम होंगे।
सरकार ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के अनुसार,
- पासपोर्ट का उद्देश्य केवल विदेश यात्रा की अनुमति देना है।
- भारतीय कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण घोषित करता हो।
- सरकार का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से लागू कानूनी व्यवस्था की ही पुनः पुष्टि की गई है।
BJP का जवाब
BJP IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि विपक्ष बिना वजह भ्रम फैला रहा है।
उन्होंने बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के तहत विशेष परिस्थितियों में भारत सरकार गैर-नागरिकों को भी भारतीय पासपोर्ट जारी कर सकती है। इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
दूसरे नेताओं की प्रतिक्रिया
- कपिल सिब्बल ने पूछा कि अगर पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर नागरिक अपनी नागरिकता किस दस्तावेज से साबित करेंगे? उन्होंने कहा कि इससे प्रशासनिक अधिकारियों के पास लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाने की गुंजाइश बढ़ जाएगी।
- जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के बयान को तर्कहीन बताते हुए सवाल किया कि क्या सरकार गैर-भारतीयों को भी भारतीय पासपोर्ट जारी करती है?
भारत में नागरिकता कैसे तय होती है?
भारत में कोई एक ऐसा दस्तावेज नहीं है जिसे सभी नागरिकों के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाता हो।
नागरिकता का निर्धारण Citizenship Act और उससे जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर होता है। आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज है, जबकि पासपोर्ट यात्रा के लिए जारी किया जाता है।


पासपोर्ट सेवा पर सरकार का दावा
सरकार के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में:
- पासपोर्ट सेवा केंद्रों की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई।
- 1.47 करोड़ से अधिक चिप आधारित ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं।
- पासपोर्ट बनने का औसत समय 5-6 दिन रह गया है।
- अब 27 देश भारतीय नागरिकों को वीजा-फ्री एंट्री देते हैं।
1 जुलाई से पासपोर्ट होगा महंगा
सरकार ने 14 साल बाद पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी की है।
- 36 पेज सामान्य पासपोर्ट: ₹1,500 ➜ ₹2,500
- तत्काल पासपोर्ट: ₹3,500 ➜ ₹5,000
- 60 पेज सामान्य पासपोर्ट: ₹2,000 ➜ ₹3,500
- 60 पेज तत्काल पासपोर्ट: ₹4,000 ➜ ₹6,000
नई फीस 1 जुलाई से लागू होगी।
आपकी राय क्या है? क्या भारत में पासपोर्ट को नागरिकता का आधिकारिक प्रमाण माना जाना चाहिए, या सरकार का मौजूदा नियम सही है? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।









