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नकली ‘इलेक्ट्रॉन’ सीड ट्रीटमेंट पर UPL ने जारी चेतावनी

त्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों में कृषि विभाग की एक विशेष टीम ने छापेमारी कर नकली कृषि रसायनों के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के दौरान खेती-किसानी से जुड़ी जानी-मानी कंपनी यूपीएल (UPL) के लोकप्रिय बीज उपचार उत्पाद ‘इलेक्ट्रॉन’ (Electron) की लगभग 2,500 लीटर नकली खेप जब्त की गई है। बाजार में बड़े पैमाने पर जाली कृषि उत्पादों की इस आमद को देखते हुए निर्माता कंपनी UPL ने देश के किसान समुदाय के लिए एक बेहद जरूरी और सतर्क करने वाली चेतावनी जारी की है, जिसमें खरीदारी के वक्त विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

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क्या है ‘इलेक्ट्रॉन’ और क्यों है यह फसलों के लिए जरूरी?

‘इलेक्ट्रॉन’ वास्तव में UPL द्वारा विकसित किया गया एक आधुनिक सीड ट्रीटमेंट (बीज उपचार) सॉॉल्यूशन है। इसे मुख्य रूप से बुआई के शुरुआती दौर में बीजों और नए अंकुरों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।

  • दोहरी सुरक्षा का फॉर्मूला: इस उत्पाद में फफूंदनाशक (फंगीसाइड) और कीटनाशक (इन्सेक्टिसाइड) दोनों के गुण मौजूद हैं। यह शुरुआती अवस्था में लगने वाले हानिकारक कीटों और फफूंद जनित बीमारियों से बीजों की रक्षा करता है, जिससे पौधों का शुरुआती विकास बेहतर होता है और खेत की लंबी अवधि की उत्पादकता सुरक्षित रहती है।

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नकली माल की पहचान कैसे करें? कंपनी ने साझा किए 7 सुरक्षा मंत्र

जांच टीम के मुताबिक, जब्त किए गए नकली रसायनों के डिब्बों पर वो बुनियादी जानकारियां पूरी तरह गायब थीं, जो किसी भी प्रामाणिक कृषि उत्पाद पर अनिवार्य रूप से होती हैं। जालसाजों के चंगुल से बचने के लिए कंपनी ने किसानों को निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करने की सलाह दी है:

  1. पैकेजिंग और लेबल्स की जांच: उत्पाद खरीदने से पहले उसके डिब्बे या पैकेट पर छपे लेबल को बारीकी से देखें।

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  2. जरूरी तारीखें: पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) की तारीख, एक्सपायरी (अंतिम तिथि) और बैच नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए। यदि यह गायब है, तो उत्पाद कतई न खरीदें।

  3. QR कोड का इस्तेमाल: प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए आजकल हर असली पैक पर क्यूआर कोड होता है, इसे अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके असलियत का पता लगाएं।

  4. पैकेजिंग सील: खरीदने से पहले यह जरूर देख लें कि बोतल या पैकेट की सील कहीं से टूटी या कटी हुई न हो।

  5. पक्का बिल (इनवॉइस): किसी भी अधिकृत रिटेलर या दुकानदार से सामग्री खरीदने के बाद उसकी पक्की इनवॉइस या जीएसटी बिल जरूर मांगें।

  6. अत्यधिक छूट का लालच: बाजार भाव से बहुत सस्ते मिलने वाले प्रॉडक्ट्स से दूरी बनाएं। कम कीमत वाले ये जाली उत्पाद न तो सही परिणाम देते हैं और उल्टा खड़ी फसल व मिट्टी की सेहत को भी बर्बाद कर देते हैं।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव: UPL

UPL के आधिकारिक प्रवक्ता ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “बाजार में नकली एग्री-इनपुट्स का प्रसार मेहनतकश किसानों के आर्थिक हितों के लिए एक बड़ा खतरा है। किसानों को सस्ते विकल्पों के बहकावे में आने से बचना चाहिए, क्योंकि ये अस्थाई बचत भविष्य में पूरी पैदावार को चौपट कर सकती है। हम लगातार जागरूकता अभियानों के जरिए अन्नदाताओं को जिम्मेदार कृषि पद्धतियों के प्रति शिक्षित कर रहे हैं। यदि किसी किसान को अपने क्षेत्र में ऐसे संदिग्ध रसायनों की बिक्री की भनक लगती है, तो वे तुरंत कंपनी प्रतिनिधियों या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें।”

UPL SAS: भारतीय कृषि को बदलने का संकल्प

यूपीएल सस्टेनेबल एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस (UPL SAS) वर्तमान में भारत के कृषि-तकनीकी (एग्री-टेक) क्षेत्र का एक अग्रणी और सबसे बड़ा एकीकृत मंच है।

  • एक छत के नीचे सभी समाधान: यह प्लेटफॉर्म भारतीय किसानों को उन्नत बीज उपचार, फसल संरक्षण रणनीतियों, मिट्टी के पोषण, आधुनिक उर्वरकों और डिजिटल कृषि सेवाओं के माध्यम से खेती से जुड़ी हर समस्या का वन-स्टॉप समाधान प्रदान करता है।

  • टिकाऊ खेती पर जोर: UPL ग्रुप का यह विशेष विंग देश के खाद्य उत्पादन को पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) बनाकर भारत को सस्टेनेबल और आर्थिक रूप से समृद्ध कृषि व्यवस्था की ओर ले जाने के मिशन पर काम कर रहा है।

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