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ऑटो-ई-रिक्शा पर होगी यूनिक आईडी

ई-रिक्शा की अराजकता पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस ने की नकेल कसने की तैयारी

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शहर को जाम से बचाने की दिशा में बड़ा कदम

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मप्र हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने ई-रिक्शा के बेलगाम संचालन और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत इन्हें मिली वैधानिक छूट के मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा तो प्रदेश में इन पर कंट्रोल के लिए अब सख्ती शुरू हो गई। उज्जैन में भी अब यूनिक आईडी के बिना ऑटो और ई-रिक्शा नहीं चल पाएंगे। ट्रैफिक पुलिस ने रजिस्ट्रेशन के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया है।

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ई-रिक्शा की समस्या से उज्जैन शहर भी जूझ रहा है। हाल ही में महाकाल मंदिर के आसपास चार मार्ग पुलिस प्रशासन ने ऑटो और रिक्शा के लिए प्रतिबंधित किए तो यहां ट्रैफिक व्यवस्था भी सुधर गई। अब ऑटो और रिक्शा को कंट्रोल करने के लिए प्रशसन ने शहर में संचालित सभी ऑटो और ई-रिक्शा पर कंट्रोल के लिए यूनिक आईडी प्रणाली लागू की है। बिना यूनिक आईडी के शहर में किसी भी ऑटो या ई-रिक्शा का संचालन नहीं किया जा सकेगा। महाकाल क्षेत्र में लगाए प्रतिबंध का अच्छा असर दिख रहा है। ट्रैफिक व्यवस्थित हुआ है।

7 दिन में आईडी बनवाना जरूरी

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पुलिस ने सभी ऑटो और ई-रिक्शा संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अगले सात दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से यातायात थाना, उज्जैन पहुंचकर अपनी यूनिक आईडी प्राप्त कर लें। इसके लिए वाहन के सभी वैध दस्तावेज (आरसी, परमिट, इंश्योरेंस आदि), चालक का पहचान पत्र (आधार कार्ड) लेकर जाना होगा। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही संबंधित वाहन को यूनिक आईडी जारी की जाएगी। यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सात दिन की अवधि समाप्त होने के बाद बिना यूनिक आईडी के कोई भी ऑटो या ई-रिक्शा सड़क पर नहीं उतर सकेगा। यदि कोई चालक अपनी निर्धारित शिफ्ट के अलावा अन्य समय में वाहन चलाते हुए या बिना यूनिक आईडी के पाया गया, तो उसके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई के साथ-साथ अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।

दो शिफ्टों में बंटेंगे पांच हजार वाहन
यातायात पुलिस के अनुसार वर्तमान में शहर में करीब 5,000 ऑटो और ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने और यातायात को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से सभी ऑटो और ई-रिक्शा का संचालन अब दो शिफ्टों में कराया जाएगा। प्रत्येक वाहन को एक यूनिक आईडी जारी की जाएगी, जिसके आधार पर ही उसकी संचालन अवधि (शिफ्ट) निर्धारित होगी।

ऑटो व ई रिक्शा को मिली छूट हाईकोर्ट में मुद्दा बनी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कहा कि ई-रिक्शे लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे यातायात की गंभीर समस्या पैदा हो रही है। केंद्र सरकार ई-रिक्शा को दी गई विशेष छूट को वापस लेने पर गंभीरता से विचार करे।

भारत सरकार ने साल 2018 में एक अधिसूचना जारी कर मोटर व्हीकल एक्ट के नियम-66 के तहत ई-रिक्शा और बैटरी चलित वाहनों को परमिट और लाइसेंस से पूरी तरह छूट दे दी थी। यह संशोधन मोटर व्हीकल एक्ट के मूल स्वरूप का उल्लंघन है। इस कारण अब ई-रिक्शा चलाने के लिए किसी ड्राइविंग लाइसेंस या रूट परमिट की आवश्यकता नहीं रह गई है। सख्त दंडात्मक कार्रवाई के स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण इनका बेधड़क और अराजक संचालन तेजी से बढ़ रहा है। हालात यह है कि नाबालिग भी ई-रिक्शा दौड़ा रहे हैं।

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