मां बगलामुखी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब नौ दिन में पहुंचे चार लाख से अधिक भक्त

नवमी पर नगर की सुख-समृद्धि के लिए हुआ हवन, लखुंदर नदी में ज्वारे विसर्जित, घरों में कन्या पूजन और भोज के आयोजन
अक्षरविश्व न्यूज नलखेड़ा। शारदीय नवरात्रि पर्व के अंतिम दिन सोमवार को विश्व प्रसिद्ध सिद्ध तांत्रिक पीठ मां बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों भक्त मां के दर्शन और मनोकामना पूर्ति की कामना लेकर पहुंचे। नवमी के विशेष अवसर पर माता रानी का मनोहारी शृंगार किया गया और पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया। सुबह से देर शाम तक मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा।
मंदिर में श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और विशेष हवन अनुष्ठान में भाग लिया। मंदिर समिति द्वारा नवमी पर दोपहर 12 बजे तक ही हवन की अनुमति दी गई थी। पर्व के अंतिम दिन विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ परंपरानुसार हवन और ज्वारे की बाड़ी के विसर्जन का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां बगलामुखी के दरबार में चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। भक्तों ने घंटों कतार में खड़े रहकर माता रानी के दर्शन किए। नवरात्रि के दौरान तहसील क्षेत्र सहित जिले के विभिन्न स्थानों से चुनरी यात्राएं भी मंदिर पहुंचीं। इनमें शामिल हजारों श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में चुनरी अर्पित कर आशीर्वाद लिया। नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन सुबह 6 बजे मंगला आरती और शाम 7:30 बजे संध्याकालीन आरती होती रही। आरती के समय ढोल-नगाड़ों, घंटों और घडिय़ालों की गूंज से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठता था।
नवमी के विशेष अवसर पर माता रानी की संध्याकालीन आरती रात 9 बजे के बाद संपन्न हुई। नवमी पर मंदिर में परंपरानुसार विभिन्न धार्मिक आयोजन किए गए। सुबह की आरती के बाद पुजारी परिवार ने माता के समक्ष हवन किया। इसके बाद नगर के गामोठ परिवार ने माता रानी की प्रथम पूजा-अर्चना कर भोग अर्पित किया। वहीं, देर शाम पटेल परिवार ने नगर की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ हवन किया। इसके बाद माता की संध्याकालीन आरती हुई। घट स्थापना के समय बोए गए ज्वारे की बाड़ी को पुजारी गोपालदास जी पंडा ने विधि-विधान से उठाया। इसके बाद मंदिर के पीछे स्थित लखुंदर नदी पर ज्वारों का विसर्जन किया गया। इस दौरान लखुंदर मैया की आरती भी की गई।
चल समारोह के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन
नवरात्रि के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर स्थापित माता प्रतिमाओं को नवमी पर विदाई दी गई। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना और आरती के बाद प्रतिमाओं को चल समारोह के रूप में लखुंदर नदी तट तक पहुंचाया। यहां विधि-विधान से पूजा करने के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
घरों में हुआ कन्या पूजन और भोज
नवरात्रि के अंतिम दिन नगर के कई घरों में भी माता रानी की विशेष पूजा-अर्चना की गई। परिवारों ने सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ धार्मिक अनुष्ठान किए। कई घरों में कन्या पूजन और कन्या भोज के आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने कन्याओं के पैर पूजकर उन्हें भोजन कराया और उपहार भेंट किए। इस तरह नवमी पर मंदिर से लेकर घरों तक भक्तिभाव और धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।








