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दर्दनाक हादसा : देवास रोड स्थित श्री गंगा में फूड वेस्टेज टैंक सफाई के दौरान 4 की मौत

परिवार के लिए मांगा 1 करोड़ का मुआवजा, सरकारी नौकरी, लाश नहीं उठाने पर अड़े, श्रीगंगा के सामने बैठे

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पैर फिसलने से पहले कमलेश गिरा, उसकी जान बचाने में दो अन्य आउससोर्स कर्मचारियों सहित होटल सुपरवाइजर ने भी गंवाई जान

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्रीगंगा ग्रुप के देवासरोड स्थित आउटलेट में शनिवार रात दर्दनाक हादसा हो गया। होटल के फूड वेस्टेज टैंक (खराब खाना एकत्र करने का स्थान) की सफाई कर रहे तीन प्राइवेट और एक होटलकर्मी की जहरीली गैस के प्रभाव में आने से मौत हो गई।

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टैंक में पहले एक प्राइवेट कर्मचारी गिरा, उसे बचाने के लिए बाद में अन्य लोग उतरे और मौत के मुंह में समा गए। टैंक तोडऩे के दौरान मलबा गिरने से एक पुलिसकर्मी घायल हुआ है। फिलहाल पूरे मामले की जांच पुलिस कर रही है। निगम प्रशासन इस मामले में बचने की कोशिश कर रहा है। मरने वालों में एक निगम का संविदाकर्मी भी है। होटल प्रबंधन का कहना है कि आउटसोर्स पर टैंक की सफाई करा रहे थे।

इसी दौरान एक व्यक्ति फिसल गया। उसे बचाने में अन्य गिर पड़े। दरअसल, आउटलेट में रेस्टोरेंट संचालित होता है। रोजाना इससे बड़ी मात्रा में फूड वेस्ट (खराब खाना) निकलता है। इस खाने को एक बड़े टैंक में एकत्र किया जाता है और फुल होने पर इसे खाली कराया जाता है। देवास रोड स्थित आउटलेट में यह काम आउटसोर्स के माध्यम से कराया जाता है। शनिवार को भी वाल्मीकि नगर में रहने वाले कमलेश तंबोली (30) को बोला गया था।

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वह अपने साथ वाल्मीकि नगर के ही रहने वाले नितिन (22) और मूलत: सुसनेर हाल मुकाम जांसापुरा के रहने वाले वाहिद (35) को लेकर पहुंचा था। मोटर लगाकर टैंक से खराब सामग्री निकाली जा रही थी, इसी दौरान पैर फिसलने से पहले कमलेश भीतर गिरा, उसे बचाने में नितिन , फिर वाहिद भी गिर पड़े। इन्हें टैंक में गिरता देख होटल सुपरवाइजर मनोज मीणा (25) जब टैंक की तरफ गया तो फिसलन होने से वह भी अंदर जा गिरा। यह सभी जहरीली गैस के प्रभाव में आ गए।

ऑक्सीजन की कमी हो सकती है मौत की वजह

फूड वेस्ट जब वायुरहित और बंद वातावरण में सड़ता है तो सूक्ष्मजीव एक प्रक्रिया से गुजरते हैं। इसे एनएरोबिक डायजेशन कहते हैं। इस प्रक्रिया में यह जैविक पदार्थ विघटित होकर गैस मिश्रण में बदल जाते हैं। यह एक तरह की बायोगैस होती है। इसमें मीथेन की मात्रा सर्वाधिक होती है। यह 90 से 95 फीसदी होती है। ऐसी जगह पर बगैर ऑक्सीजन सिलेंडर, मॉस्क के जाने पर हादसे की आशंका रहती है। इस मामले में भी ऑक्सीजन से कमी के कारण ही दम घुटा होगा। डॉ. दीपेंद्र रघुवंशी, एचओडी, रसायन डिपार्टमेंट माधव साइंस कॉलेज

एसपी-कलेक्टर, प्रभारी निगमायुक्त पहुंची मौके पर

मसला बड़ा होने से एसपी प्रदीप शर्मा, कलेक्टर रौशनकुमार सिंह और प्रभारी निगमायुक्त डॉ. नेहा जैन भी मौके पर पहुंचीं। शवों को रात ही जिला अस्पताल भेजा गया। ऐहतियात बतौर गु्रप के सभी आउटलेट पर फोर्स तैनात कर दिया गया। सुबह चरक भवन में भी फोर्स तैनात रहा। मौके पर एसडीएम एलएन गर्ग, सीएसपी दीपिका शिंदे पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित परिवारों को समझाने की कोशिश की। हालांकि वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। इनके बीच कशमकश जारी रही।

आउटसोर्स से साफ करा रहे थे
दिवाली के कारण फूड वेस्टेज टैंक की सफाई करा रहे थे, आउटसोर्स पर यह काम करा रहे थे। पहले भी यही टीम कई बार काम कर चुकी है। टैंक के बाहर से मोटर लगाकर ही सफाई हो रही थी। ऊपर से एक कर्मचारी का पैर फिसला और वह टैंक में जा गिरा। उसे बचाने के लिए अन्य लोग भी टैंक में गिर गए।
चेतन गुप्ता, श्री गंगा ग्रुप

लापरवाही का प्रकरण दर्ज होगा
यह मामला लापरवाही का है और संबंधित पर प्रकरण दर्ज होगा। टैंक की सफाई करने के तय नाम्र्स हैं। इसका सीधा-सीधा उल्लंघन हुआ है।
प्रदीप शर्मा, एसपी

एक घंटे की मशक्कत के बाद दीवार कटी

चारों को गिरता देख वहां मौजूद अन्य लोग घबरा गए और ताबड़तोड़ माधवनगर थाने को सूचना दी गई। यहां से पुलिसकर्मी पहुंचे और गिरे लोगों को निकालने के प्रयास शुरू किए। टैंक के ऊपरी हिस्से को काटने के लिए कटर मशीन बुलाई गई। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद टैंक की दीवार कट सकी। फिर सुरक्षा उपकरणों के साथ लोग नीचे उतरे और अंदर गिरे लोगों को बाहर निकाला, इन्हें सीपीआर देने की कोशिश की लेकिन इनकी जान जा चुकी थी। हादसे में माधवनगर थाने के सब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र मलबा गिरने से घायल हो गए।

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हक दिलाने के लिए मैदान में उतरा वाल्मीकि समाज, राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेशनाथ ने कहा सीएम से बात करेंगे

श्री गंगा ग्रुप के चारों आउटलेट बंद पुलिस बल तैनात

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री गंगा ग्रुप के देवासरोड स्थित आउटलेट पर हुए दर्दनाक हादसे ने चार घरों की दिवाली बिगाड़ दी। इससे सबसे ज्यादा आक्रोश वाल्मीकि एवं हेला समाज में है। इस समाज के तीन लोग मारे गए हैं। इन लोगों के परिवार के लिए 1 करोड़ रुपए का मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग की जा रही है। चरक भवन में समाजजन ने ऐलान किया कि जब तक मांग पूरी नहीं होती, वे शव नहीं ले जाएंगे। सुबह 11.30 बजे परिवार की महिलाएं देवासरोड आउटलेट के सामने धरने पर बैठ गईं।

वाल्मीकि समाज के धर्मगुरु बालयोगी उमेशनाथ ने हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में सीएम डॉ. मोहन यादव से मांग करेंगे। आदर्श वाल्मीकि समाज के अध्यक्ष राकेश गिरजे ने कहा कि होटल संचालक के खिलाफ 302 की कार्रवाई होनी चाहिए। जान गंवाने वालों के परिवार को 30 लाख से 1 करोड़ रुपए तक का मुआवजा चािहए। घटना के बाद ग्रुप के चारों आउटलेट (फ्रीगंज, नानाखेड़ा, देवासरोड और श्री बेकर्स) बंद रहे।

रविवार सुबह हादसे में जान गंवाने वालों के शव का पीएम किया गया। पहला पीएम होटल सुपरवाइजर मनोज मीणा का हुआ। फिर कमलेश तंबोली, नितिन और वाहिद का पीएम हुआ। मनोज का शव लेने तो चचेरा भाई मुकेश आया था। वह पीएम के बाद रवाना भी हो गया, लेकिन बाकी के शव परिजन और समाजजन ने उठाने से मना कर दिया। वे मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग पर अड़े थे।

प्रशांति ग्रुप के अवनीश गुप्ता मध्यस्थता करने पहुंचे

समाजजनों से बातचीत करने के लिए प्रशांति ग्रुप के अवनीश गुप्ता पहुंचे। उनके सामने उज्जैन आदर्श वाल्मीकि समाज के अध्यक्ष राकेश गिरजे ने 30 लाख से 1 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग रखी। शासन ने उन्होंने संबंधित ग्रुप संचालकों पर हत्या का प्रकरण दर्ज करने और एक सदस्य को नौकरी मांगी। दोनों पक्षों के बीच सुबह ११ बजे तक बातचीत जारी थी और कोई नतीजा सामने नहीं आया था।

नितिन

कल ही अवकाश से लौटा था मनोज

मूलत: राजस्थान के झालावाड़ के मडावर के रहने वाले सुपरवाइजर मनोज ने चार साल पहले ही श्रीगंगा ग्रुप ज्वाइन किया था। शनिवार दोपहर ही वह चार दिन के अवकाश के बाद काम पर लौटा था। दिवाली की ग्राहकी को देखते हुए वह काम पर आया था। उसका भाई विकास मीणा भी ग्रुप में है। मनोज को क्या पता था कि मौत उसे यूं खींच लाएगी।

नगर निगम का संविदाकर्मी है कमलेश

वाल्मीकि नगर का रहने वाला कमलेश तंबोली नगरनिगम के संविदाकर्मी था। उसकी पदस्थी वार्ड नंबर 38 में थी। 29 दिन की अवधि में उसको रखा गया था। वह ही अपने साथ नितिन और वाहिद को लेकर गया था। पहले भी वह होटल के टैंक की सफाई कर चुका है। तंबोली के परिवार में विधवा मां, एक भाई, पत्नी और एक बच्चा है। वह घर का इकलौता कमाने वाला था। नितिन के घर में सिर्फ मां है।

वाहिद के बच्चें से उठा पिता का साया

वाहिद मूलत: सुसनेर का रहने वाला था। वह जांसापुरा में पहलवान का टेकरा पर रहता था। उसके परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं। अब इन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है।

यह हुई लापरवाही : नगरनिगम शुल्क लेकर साफ करता है सेप्टिक टैंक: सेप्टिक टैंक साफ करने का काम नगरीय निकाय करते हैं। निकाय इसके लिए 200 से 500 रुपए तक शुल्क लेते हैं। निकाय के प्रशिक्षित कर्मचारी सक्सर मशीन की मदद से सफाई करते हैं। अगर टैंक में उतरने की जरूरत भी पड़े तो वे सुरक्षा उपकरणों के साथ उतरते हैं। उपायुक्त संजेश गुप्ता कहते हैं कि पहली बात तो सेप्टिक टैंक का मसला संवेदनशील है। इसकी सफाई मशीन से ही होती है। अगर जरूरत पड़े तो कर्मचारी सुरक्षा उपकरणों के साथ सफाई करते हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर, मॉस्क, गम बूट और स्पेशल चश्मे वह लगाते हैं। आउटसोर्स पर भी एजेसियां काम करती हैं, पर यह निकाय से अधिकृत होती हैं। इन्हें सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है।

इतना भारी मुआवजा कैसे देंगे, 10 लाख तक दिलवा सकते हैं: मृतकों के परिवार के प्रति हमारी भी संवेदना है, पर 50 लाख रुपए का मुआवजा निजी तौर पर देना बहुत बड़ी बात है। 10 लाख रुपए तक दिए जा सकते हैं। थोड़ा-बहुत कुछ और ऊपर किया जा सकता है। पर डिमांड राशि बहुत बड़ी है।
अवनीश गुप्ता
(दोनों पक्षों से बातचीत करने वाले)

श्रीगंगा ग्रुप के आउटलेट्स पर बढ़ाई पुलिस सुरक्षा
हादसे का असर रविवार को श्री गंगा ग्रुप के आउटलेट्स पर भी देखा गया।

देवासरोड, सी-21 नानाखेड़ा, फ्रीगंज के आउटलेट और बेकरी बंद रहे। यहां तोडफ़ोड़ की आशंका में भारी पुलिसबल भी तैनात किया गया।

यह दु:खद- सरकारी स्तर पर मुआवजा नहीं मिलेगा: सुप्रीम कोर्ट ने सीवरेज सफाई में हादसे होने पर तगड़े मुआवजे का प्रावधान किया है। मौत की स्थिति में 30 लाख, स्थायी दिव्यांगता पर 20 लाख और अन्य दिव्यांगता पर 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है। 20 अक्टूबर 2023 को जस्टिस एस रवींद्र भट्ट और अरविंद कुमार ने यह फैसला जनहित याचिका पर सुनाया था। लेकिन यह मुआवजा निकाय स्तर पर होने वाले हादसे में दिया जाता है। श्रीगंगा का मामला निजी है, क्योंकि यहां निकाय से संपर्क किया ही नहीं गया, ऐसे में मुआवजा कैसे मिलेगा, यह सवाल सामने खड़ा है।

दम घुटने से मौत की आशंका: श्री गंगा के मृतकों का विसरा जांच के लिए भेजा जा रहा है। कपड़े जब्त किए है। प्रारंभिक तौर पर दम घुटने से मौत होने की आशंका है। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद सही कारण पता चलेगा।
-डॉ. विक्रम रघुवंशी, सीएमएचओ

गैरकानूनी तौर पर टैंक सफाई के लिए बुलाया: वाल्मीकि और हेला समाज के लोगों को गैरकानूनी तरीके से टैंक की सफाई के लिए बुलाया था। होटल मालिक या उनके लोगों ने गैरकानूनी काम किया है। इसमें लेबर एक्ट का उल्लंघन भी किया गया है। एक व्यक्ति की भूल की वजह से चार लोगों ने जान गंवाई है। इस मामले में एफआईआर होनी चाहिए और हम एफआईआर कराएंगे।
-बबलू डागर, अध्यक्ष अभा सफाई मजूदर संघ

एफआईआर हो, उचित मुआवजा-नौकरी मिले: होटल मालिक दोषी है। उस पर हत्या की एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। सेप्टिक हादसे में 30 लाख से 1 करोड़ का मुआवजा देने का प्रावधान है। हमें यह चाहिए। मृतकों के परिजनों को नौकरी दी जाए।
राकेश गिरजे, अध्यक्ष आदर्श वाल्मीकि समाज

महापौर मुकेश टटवाल के सामने मांग रखते परिजन और समाजजन

 

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