पीएम आवास के नाम से भेज रहे फर्जी लिंक, क्लिक करते ही बंद हुआ मोबाइल

ठगी के लिए अब शासकीय योजनाओं का ले रहे सहारा
अक्षरविव न्यूज शाजापुर। साइबर ठग अब लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए सरकारी योजनाओं का सहारा ले रहे हैं। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर लोगों को फर्जी लिंक भेजकर ठगी का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। मैसेज में लोगों से लिंक पर क्लिक कर योजना में अपना नाम देखने के लिए कहा जा रहा है। लिंक खोलते ही कुछ लोगों के मोबाइल बंद या हैंग होने की शिकायत सामने आई है।
सलसलाई और तिंगजपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में कई लोगों के मोबाइल पर इस तरह के मैसेज पहुंचे हैं। खास बात यह है कि कुछ लोगों के मोबाइल से यह मैसेज उनकी जानकारी के बिना अन्य लोगों को भी भेजे गए। हालांकि, अभी तक इस लिंक के माध्यम से किसी व्यक्ति के बैंक खाते से रकम निकाले जाने या ठगी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस ने लोगों से ऐसे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने की अपील की है। साथ ही व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते, एटीएम, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी है। पुलिस के अनुसार, साइबर ठग फर्जी लिंक के माध्यम से मोबाइल तक पहुंच बनाने या बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। सरकारी योजना से संबंधित जानकारी केवल अधिकृत सरकारी वेबसाइट या संबंधित विभाग से ही जानकारी प्राप्त करें।
फिर सामने आए दो मामले
सलसलाई थाना क्षेत्र में साइबर ठगी के दो मामले सामने आए हैं। आरोपियों ने एक बुजुर्ग और एक युवक से 4.15 लाख रुपए ठग लिए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गुलाना निवासी महेशचंद्र वर्मा (71) को 23 सितंबर को अनजान नंबर से काल आया। काल करने वाले ने खुद को बैंक कर्मचारी बताया और सीनियर सिटीजन पैन कार्ड सत्यापन के नाम पर एटीएम कार्ड नंबर और पासवर्ड मांगा। महेशचंद्र ने जानकारी साझा कर दी, जिसके बाद उनके खाते से 3 लाख रुपए निकाल लिए गए। शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया है।
दूसरे मामले में ग्राम किठोर निवासी लखन को 25 सितंबर को सस्ती ज्वेलरी देने का झांसा दिया गया। आरोपी ने वाट्सएप पर ज्वेलरी के फोटो भेजे और कम कीमत में देने का भरोसा दिलाया। इसके बाद लखन ने आरोपी के बताए खातों में 1.15 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रुपए मिलने के बाद आरोपी ने मोबाइल बंद कर दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मामले को लेकर सलसलाई थाना प्रभारी जनकसिंह रावत ने बताया कि जिन खातों में रुपए जमा कराए गए थे, वहां से राशि निकाली जा चुकी है। पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले किसी भी व्यक्ति को एटीएम नंबर, पिन, ओटीपी या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी न दें।
उन्होंने कहा कि सस्ती ज्वेलरी या ऑनलाइन सामान के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के खाते में रुपए ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह जांच कर लें। साइबर ठगी होने पर तत्काल बैंक को सूचना देने के साथ साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।









